Processor Kya Hota Hai, Processor Meaning In Hindi

(Processor kya hota hai) रेत से कैसे बनता है कंप्यूटर के यह प्रोसेसर जानिए पूरा प्रोसेस इस पोस्ट में:- क्या आपको पता है कि रेत से भी कंप्यूटर बना जा सकता है, लेकिन मुझे भी नहीं पता था और मुझे कभी भरोसा भी नहीं होता था, कि कभी रेत सभी कंप्यूटर बन सकता है, लेकिन कुछ रिसर्च के बाद पता चला कि रेत से भी कंप्लीट बना जा सकता है। चलिए आज इस बारे में आपको हम अच्छे और विस्तार रूप से बताते हैं।

जो हमारे गैजेट्स होते हैं जैसे कि लैपटॉप डेक्सटॉप मोबाइल स्मार्ट टीवी उसमें एक प्रोसेसर लगा होता है क्या आपको पता है, कि वह अपने से सर कैसे बनता है, नहीं पता तो आज हम आपको बताते हैं यह प्रोसेसर रेत से बनता है। “Processor Kya Hota Hai”

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यह प्रोसेसर इतना महत्वपूर्ण होता है, की इसके बिना लैपटॉप कंप्यूटर स्मार्ट टीवी मोबाइल आदि चल नहीं सकता है, क्योंकि इस प्रोसेसर सी ही हमारे गैजेट्स ऑपरेट होता है। यह प्रोसेसर एक खास किस्म की सिलिकॉन से बनी होती है। जो एक तरह का चीफ होता है जो मारे डिवाइस में लगा हुआ होता है। जिससे हमारे डिवाइस अच्छे से काम कर पाता है।

यह प्रोसेसर हमारे यहां कंप्यूटर एवं अन्य गैजेट्स के अंदर के सभी प्रकार के जानकारी का पता रखता है और हमारे मोबाइल या डिवाइस में जो भी वह काम होता है। वह हमारे प्रोसेसर की कमांड देते हैं यह एक प्रकार का मस्तिष्क होता है।

जब तक हम कंप्यूटर को कोई भी कमांड नहीं देते हैं, तब तक वह कुछ भी नहीं समझ पाता है जब हम कंप्यूटर को या लैपटॉप को कमांड देते हैं या कुछ बताते हैं तो वह मुझे आउटपुट देता है जिससे कि मुझे समझ में आता है।

यह प्रोसेसर बनाया कैसे जाता है?

यह प्रोसेसर का एक बेसिक कंपोनेंट है सिलिकॉन चिप जो उसके अंदर लगा होता है, और उस सिलिकॉन चिप को बनाने का रॉ मैटेरियल लगता है, सिलिकॉन जोगी रेट में पाया जाता है। रेत से सिलीकान डाइऑक्साइड और सिलिकॉन से बना होता है, इसलिए इसमें सिलिकॉन पाया जाता है। रेत से सबसे ज्यादा निकलने वाला यह दूसरा एलिमेंट है जिससे कि यह प्रोसेसर बनता है।

प्रोसेसर बनाने के लिए सिलिकॉन का यूज़ क्यों किया जाता है?

सिलिकॉन सेमीकंडक्टर नेचर का एलिमेंट है वैसे कंडक्टर ऐसी चीजों को बोलते हैं इसके थ्रू इलेक्ट्रिसिटी पास हो सके। सिलिकॉन के जरिए इलेक्ट्रिसिटी पास हो सकती है लेकिन कितने माउंट में पास होगी ऐसे भी हम आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं इसीलिए हम सिलिकॉन को सेमीकंडक्टर नेचर का एलिमेंट कहते हैं।

सिलिकॉन के नेचर का यूज़ मोबाइल कंप्यूटर के प्रोसेसर बनाने में इस्तेमाल किया जाता है यह पूरा प्रोसेस जरा साल यूनिट पर काम किया जाता है, पहले यूनिट में सेंड करो करीब 1000 डिग्री सेल्सियस पर गर्मी क्या जाता है, और कुछ केमिकल इस्तेमाल करके उसके भीतर मौजूद सिलिकॉन को निकाल लिया जाता है।

सेंड के भीतर से जो सिलिकॉन निकलता है सिलिकॉन बहुत ही छोटे आकार का होता है जोकि यह सिलिकॉन को गर्म करके और कुछ कमी कल का उपयोग करके सिलिकॉन का एक सॉलिड सिलेंडर तैयार कर लिया जाता है इसका वजन 100 से 200 किलो तक होता है।

इस प्रोसेस से सिलिकॉन सॉलि़ड सिलेंडर तैयार होता है वह 99.99% प्योर होता है हालांकि इसके बाद सिलेंडर के प्योरिटी कई दूसरे टेस्ट करके भी जाना जाता है। एक बार जब सिलेंडर प्योरिटी टेस्ट में अच्छा निकल जाए तब उसके बाद पतले पतले साइज का काटा जाता है जिससे वेफर्स कहां जाता है।

यह वेफर्स चिप्स मैन्युफैक्चरर्स के बताए गए अनुसार उस थिकनेस हिसाब से काटे जाते हैं। एक बार कटिंग का काम पूरा हो जाए तब इन वेफर्स को पोलिस करके बिल्कुल स्मूथ बना दिया जाता है। जिससे कि सरफेस रफनेस पूरी तरह बाहर निकल जाए।

Processor kya hota hai

तब इस वेफर्स को उस कंपनी तक पहुंचा दिया जाता है। जहां पिया चिपका मैन्युफैक्चरर्स का काम होता है। जब यह वेफर्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी पहुंच जाती है। तब उस पर्पस को अच्छे से पॉलिश कर के उसके ऊपर मिलियंस ऑफ ट्रांजिस्टर चढ़ाया जाता है।

जहां पर यह चिप्स तैयार किया जाता है। वहां पर सबसे ज्यादा साफ सफाई होता है, जो कि लगभग एक हॉस्पिटल में आईसीयू में साफ सफाई होता है, उससे भी लाभ गुना ज्यादा साफ-सफाई होता है, क्योंकि उस जीभ में थोड़ा सा भी डस्ट चले जाए तब वह प्रोसेसर या चीफ अच्छी तरह से काम नहीं कर पाएगा।

अब यह वेफर्स को चीफ में बदलने का प्रोसेस शुरू किया जाता है। इस यूनिट में सबसे पहले वेफर्स को सिलिकॉन डाइऑक्साइड लेयर चढ़ाए जाते हैं, इसके बाद उसके ऊपर फोटो सनसिटी की केमिकल चढ़ाई जाती है इस प्रोसेस को फोटो लिथोग्राफी कहा जाता है।

अगले स्टेप मैं जो डिजाइन क्या हुआ होता है, उसको इस वेफर्स पर बनाया जाता है इस प्रोसेस को अल्ट्रावायलेट लाइट से अंजाम दिया जाता है यानी उस डिजाइन को अल्ट्रावायलेट रे से गुजारा जाता है उसके नीचे एक लेंस लगा होता है जो लाइट के बीम को छोटा क्या जाता है,

जोकि इस छोटे भीम से एक स्पेसिफिक स्थानों पर टारगेट किया जाता है अब जहां-जहां अल्ट्रावायलेट रे पढ़ती है वहां का फोटो रजिस्टेंस सॉल्युबल हो जाता है पूरा झील हो जाता है। इस प्रोसेस के बाद इस वेफर्स को सॉल्वेंट में डूबा जाता है, जिससे कि सॉफ्ट मैटेरियल जो भी होता है वह हट जाता है. और जो हार्ड मटेरियल होता है वह वहीं पर बस जाता है।

Processor in hindi

अब फिर से दूसरा प्रोसेस स्टार्ट होता है जिसमें कि फिर से फोटो रजिस्टर लेयर को हटाया जाता है और ट्रांजिस्टर का डिजाइन सेप था वह नजर आने लगता है उसके बाद फिर से फोटो रजिस्टेंस केमिकल टाइप के लेयर चढ़ाया जाता है फिर अल्ट्रावायलेट लाइट पर रन किया जाता है इसके बाद शुरू होता है ड्रॉपिंग प्रोसेस।

सिलिकॉन के अंदर आईएन से बैंड किया जाता है इसके मदद चाहिए ट्रांजिस्टर के अंदर इलेक्ट्रिसिटी का फॉलो कंट्रोल किया जा सकता है इस ड्रॉपिंग प्रोसेस को करने के बाद फोटो रिस्टैंस लेयर को हटा दिया जाता है उसके ऊपर कॉपर के लिए चढ़ा दिया जाता है।

फिर उसके बाद बारी आती है वायरिंग की अब जीत के अंदर भीतर वायरिंग की जाती है इस पूरी प्रोसेस को माइक्रो लेवल पर किया जाता है जिससे कि हमारे प्रोडक्ट में कोई कमी ना रह जाए। यह प्रोसेसर इतनी छोटी होते हैं कि इसमें कोई सीमा स्ट्राइक हम देख नहीं सकते इसलिए हम देखने के लिए माइक्रो का इस्तेमाल करते हैं जिससे कि हम बारीकी से देख पाए।

उस शिप अंदर 760 लेयर की वायरिंग होती है उसके बाद वेफर्स को कट किया जाता है। एक पेपर के अंदर कई सारी चीज बन जाते हैं इसके बाद काट के अलग अलग किया जाता है अब उसके बातचीत की टेस्टिंग की जाती है फिर उसके बाद पैक किया जात कर दिया जाता है आपने देखा होगा कि चिपकी पैकेजिंग मोगली नहीं होती है। इन्हें काले कलर के केस में पैक किया जाता है और दोनों कोनों पर वायर भी नजर आता है जो कांटे की तरह दिखते हैं।

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