History Of Computer In Hindi (कंप्यूटर का इतिहास और विकास हिंदी में)

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आज का योगा विज्ञान का युग है। इस युग में कंप्यूटर इंसान की जरूरत है। इस लिहाज से आज के युग को कंप्यूटर का प्रयोग किया जाता है, तो इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है। शिक्षा से लेकर मनोरंजन और यातायात से लेकर स्वास्थ्य तक लगभग हरेक क्षेत्र में कंप्यूटर ने अपने उपयोगिता का सिद्ध किया है।

बावजूद इसके इससे जुड़े कई ऐसे जानकारी है जिनसे हम बेखबर है क्या है वह जानकारी, (Computer ke janak) कंप्यूटर का निर्माण चार्ल्स बैबेज ने किया था। जिसे हम फादर ऑफ कंप्यूटर (Father of computer in hindi) भी कहते हैं। बात 18वीं सदी की है पूरी दुनिया तकनीक के नाम से बिल्कुल अनजान थी। इंसान अपनी आंखों से जो देखता था,

बस उसी पर विश्वास करता था, तकनीक से दूर-दूर तक दुनिया के लोगों को कोई लेना-देना नहीं था। इसी बीच लंदन में पैदा हुए चार्ल्स बैबेज ने लोगों की सोच को बदलने का काम किया चार्ल्स बैबेज को बचपन से ही विज्ञान में रुचि था। इस रुचि के कारण उन्होंने आगे चलकर कंप्यूटर का निर्माण किया।

चार्ल्स बब्बेज ने 14 जून 1822 मैं कंप्यूटर बनाने का दावा किया था (Computer ka aviskar kab hua or birth of computer), हालांकि बहुत सारे इतिहासकार इस बात से इनकार करते हैं, कि चार्ल्स बैबेज ने ही कंप्यूटर का अविष्कार किया था माना जाता है, कि चार्ल्स बैबेज कंप्यूटर मशीन बनाने में कामयाब रहे। Notes: Computer name in hindi:- sanganak

Computer history in hindi

उस मशीन को पूरी तरह से नहीं बना पाए शुरुआत में उन्होंने एक बेहद बड़े आकार के मशीन का अविष्कार किया था। जो कि चार्ल्स बैबेज गणित के छात्र थे, तो उनका इस मशीन को बनाने का मकसद नंबरों की गणना करना था, जिसके कारण मशीन का आविष्कार किया।

उस वक्त चार्ल्स बैबेज ने मशीन को डिफरेंट इंजन का नाम दिया था, हालांकि यह मशीन सिर्फ गाना कर सकते थे। यह नहीं बता सकता था कि काउंटिंग ठीक है या नहीं। जो सिर्फ एक कंप्यूटर बता सकता है, इसीलिए कई विशेषज्ञों का कंप्यूटर के अविष्कार को लेकर अलग-अलग मथ है।

लेकिन चार्ल्स बैबेज अविष्कार से कंप्यूटर तकनीक के नीव रख चुके थे। 18 वीं सदी के दौरान चार्ल्स बैबेज के कंप्यूटर के अविष्कार बाद लोगों में इस तकनीक को जानने और उसको समझने के दिलचस्पी जगी समय के साथ कई चीजों में बदलाव आ रहा था। “History of computer in hindi”

लेकिन फिर भी दुनिया के लोगों को अभी कंप्यूटर जैसी कोई मशीन बनने का कोई अनुमान नहीं था, हालांकि वह विभिन्न देशों के वैज्ञानिक नई नई मशीनों को खोजना में लगे हुए थे, तकनीक के योग्य दूसरा सबसे बड़ा दिन तब आया जब जर्मनी के वैज्ञानिक कोनराड ने प्रोग्रामिंग कंप्यूटर का आविष्कार कर दिया।

यह 1936 और 1938 के बीच का दौर था। कोनराड जूस का आविष्कार इसलिए काफी अहम था उन्होंने पहले प्रोग्रामिंग कंप्यूटर का आविष्कार किया था चार्ल्स बैबेज के मशीन काफी हद तक इंसानी दिमाग पर निर्भर करती थी, लेकिन कोनराड जूस कंप्यूटर खुद प्रोग्रामिंग से चलता था।

History of computer hindi

कोनराड इस कंप्यूटर का नाम Z-1 दीया, डिजिटल कंप्यूटर ने बदली तस्वीर कोनराड जूस के अविष्कार के बाद यूरोपियन देशों नई क्रांति का संचार हो गया था। समय के साथ कंप्यूटर की मांग बढ़ती जा रही थी। कंप्यूटर के अविष्कार ने बहुत सारे लोगों को प्रभावित किया।

यह हजारों लोगों के काम खुद अकेला ही कर सकता था। जिन कामों को करने में बहुत ज्यादा समय लगता था वह काम चुटकियों में हो जाता था। कंप्यूटर लाखों करोड़ों का हिसाब बहुत ही कम समय में कर दिया करता था। इससे लोगों कंप्यूटर के तरफ आकर्षित होने लगे हालांकि उस समय लोगों ने यही सोच लिया था। “History of computer in hindi”

कोनराड चूसने प्रोग्रामिंग कंप्यूटर का आविष्कार किया है। वही दुनिया में आखिरी आधुनिक अविष्कार है शायद ही लोगों का अंदाजा था आने वाले जल्दी दिनों में इस अविष्कार से भी अच्छी तकनीक और अच्छी मशीन देखने को मिलेगा समय तेजी से गुजरता गया। तकनीक की दुनिया में दिन-प्रतिदिन बदलता माथे जाए हर नए बदलाव इंसान को चौका देता है और सोचने पर मजबूर कर देता है कि विज्ञान बहुत ही तेजी से छा रहा है और आगे बढ़े रहा है

जे. प्रेसपर एकर्ट ने किया डिजिटल कंप्यूटर

कोनराड जूस के अविष्कार चंद सालों बाद लोक तकनीकी दुनिया में एक नए अविष्कार के गवाह बने जब जे. प्रेसपर एकर्ट दुनिया को पहला इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर दीया यह कंप्यूटर पूरी तरह से डिजिटल था सबसे बड़ी बात या थी इस कंप्यूटर के पास से ही हर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण डिजिटल रूप में आने लगा।

Computer ka itihas

सालों से उपयोग की जा रही सुई वाली घड़ी जगह डिजिटल घड़ी ने ले ली यह सब चीजें जे. प्रेसपर एकर्ट के डिजिटल कंप्यूटर खोजने के बाद वजूद में आई थी जे. प्रेसपर एकर्ट ने डिजिटल कंप्यूटर खोज साल 1946 किया था जे. प्रेसपर एकर्ट ने डिजिटल कंप्यूटर का खोज अपने प्रोफेसर जॉन मोकली के साथ मिलकर की थी। “History of computer in hindi”

जॉन मोकली, जे. प्रेसपर एकर्ट को विज्ञान पढ़ाया करते थे। दोनों ने डिजिटल कंप्यूटर की खोज के बाद इसको पेटेंट कराया और सरकार से डिजिटल कंप्यूटर बनाने का अनुबंध तय कर लिया इसके तहत दोनों ने मिलकर डिजिटल कंप्यूटर बनाना शुरू किया दोनों ने इसे एन आई एस का नाम दिया जिसका मतलब था।

इलेक्ट्रॉनिक्स न्यूमेरिकल इंटीग्रेटेड एमड कंप्यूटर डिजिटल कंप्यूटर ने दुनिया में तहलका मचा दिया इस तरह जे. प्रेसपर एकर्ट और मोकली के अविष्कार बाद कंप्यूटर को एक नई पहचान मिली आगे चलकर डिजिटल कंप्यूटर की ओर उपयोगिता के देखते हुए यूएसए ने संख्याओं को गन्ना के लिए इसका इस्तेमाल किया।

ईसीसी बनी पहली कंप्यूटर कंपनी

दुनिया के लोगों ने जिस मशीन के बारे में कभी नहीं सोचा था। वह मशीन एक कट्ठा मोकली ने कुछ सालों के मेहनत के बाद बनाकर तैयार कर दिया था। संयुक्त रूप से बनाया गया। कंप्यूटर उनकी सबसे बड़ी ताकत बन चुका था। कंप्यूटर के अविष्कार के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी।

इसको बनाने की इसमें सबसे मुश्किल काम यह था। की फार्मूला कौन सी कंपनी को दिया जाए और फिर उस फॉर्मूला के तहत बहुत सारी कंप्यूटर तैयार किया जाए, दोनों ने ऐसा करना उचित नहीं समझा इसलिए दोनों ने संयुक्त रुप से अपने ए कंप्यूटर कंपनी खोलने का मन बना लिया।

कंप्यूटर हिस्ट्री

दोनों ने डिजिटल कंप्यूटर बनाने की कंपनी खोली और खुद ही कंप्यूटर तैयार करना शुरू कर दिया। इस कंपनी को नाम दिया गया ईसीसी एसीसी यानी इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल कंपनी दुनिया की पहली कंप्यूटर कंपनी थी हालांकि दोनों ने बाद में कंपनी का नाम बदलकर अपना नाम पर बना लिया।

कंपनी खोलने के बाद दुनिया में कंप्यूटर जगत में क्रांति आ गई यह दौड़ था। साल 1950 का जब दुनिया में लोग कंप्यूटर के नाम से परिचय हो रहा था। समय के साथ 18 कंप्यूटर को और विकसित करने के लिए नए-नए अविष्कार करते रहे, “History of computer in hindi”

डिजिटल कंप्यूटर अविष्कार के बाद दोनों कंप्यूटर के दुनिया में 85 अविष्कार किए। जिनको अपने नाम से पैटर्न कराया विज्ञान के क्षेत्र में योगदान को देखते हुए साल 1968 नेशनल अवार्ड साइंस से नवाजा गया समय के साथ कंप्यूटर डिमांड बड़ी। आज हमारे जीवन का एक अंग बन चुका है।

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